लड़कियों की बात

लड़कियों की बात
"""""""""""""""

Alfazbook

एक दिल की बात कहने दो मुझे, 
आजाद हवा में बहने दो मुझे,
क्यों...?  क्यों बनूँ  मैं औरों की तरह, 
मै जो हूँ वही रहने दो मुझे, 

तू बता ये ज़िन्दगी कब तक सहूँ ये दरिंदगी, 
कब तक...? समाज के लिए मिटती रहूँ, 
हर ख्वाहिश मार कर बस घुटती रहूँ, 
मत बांधो जंजीरो जैसी गहनों में मुझे, 
मै जो हूँ वही रहने दो मुझे, 

किसी को मेरा हंसना नहीं भाता, 
किसी को मेरा बोलना नहीं भाता, 
किसी को मेरा इधर-उधर डोलना नहीं भाता,
अब तो कपड़ो पे भी लगा दी हजार बंदिशे,

कैसे पूरी करूँ जीने की ख्वाहिशें, 
अगर पाप है लड़की होना, 
तो मिट्टी में गलने दो मुझे, 
वरना मै जो हूँ वही रहने दो मुझे, 

क्यों...? क्यों हूँ मैं ज़िम्मेवार......
हर ज़िम्मेदारी के लिए, 
क्यों सुनूँ हर ताना समझदारी के लिए, 
कोई एक भी खुश ना हो तो कहते, 
ये लड़की अच्छी नहीं, 

क्यों मैं रखूँ सब को खूश 
मै तो कोई अप्सरा नहीं, 
खूश करने का दिखावा नहीं आती मुझे, 
मै जो हूँ वही रहने दो मुझे.... 
मै जो हूँ वही रहने दो मुझे....

अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़ 

Alfazbook

Comments

Post a Comment

अपने बहुमूल्य विचार हमसे साझा करें। ...