घर परिवार और समाज
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फैसला हो ही नहीं पाया बहुत बातों के बाद,
कौन खुलता है यहाँ कितनी मुलाकातों के बाद,
पत्थर दिल के सामने आँसुओ की क्या औकात,
अच्छे-अच्छे घर टूट जाते हैं गलत बातों के बाद,
जिन्हे आपस में बात करने की फुर्सत नहीं मिलती,
उसी घर के बच्चे रिश्ते नहीं समझते बड़े होने के बाद,
जायदादें कहाँ बँटी इनमे, जायदादों में बँट गए भाई,
गलत विचारों व गलत संगत के बाद,
किसी का राज किसी से नहीं कहा करते ,
यह सोच इंसानों मे पाई जाती है,
मगर अच्छे इल्म हासिल करने के बाद,
और आपके अल्फाज़ एक मुझको हीं तो
उदास कर नहीं जाता,
आपकी गलत गुफ्तगू के बाद,
वो दिन गए की मोहब्बत थी जान की बाजी,
अब कोई मर नहीं जाता किसी से बिछड़ने के बाद,
जवां नजरों पर कब ऊँगली उठाना भूल जाते हैं लोग,
पुराने लोग हैं अपना जमाना भूल जाते हैं लोग,
कूछ उम्र गुजारने के बाद,
खुल के मिलने का सलीका अब किसी को आता नहीं,
ये फेसबुक व्हाट्सप्प हाई स्पीड इंटरनेट आ जाने के बाद,
आप अभी अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़ की
अल्फाजों की खूशबू मे महक रहे हैं,
फिर भूल जाओगे मेरे लिखने के बाद,...
अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़
Bahut badhiya
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