तबाह-ऐ-ज़िन्दगी....🎂🎂🎂


किताबें पढ़ते-पढ़ते खुद 

कहानी के जैसा हो गया हूँ मैं,

खुद से बाते कर कर के 

खुद में ही खो गया हूँ मै,


ना मेरा नाम है, ना दाम है

 बजार-ऐ-दुनिया में ,

सफल लोगों की ज़िन्दगी पढ़ कर 

और भी सस्ता हो गया हूँ मैं,


बिता दी एक साल और 

मैंने खुद को परखने में ,

शायद, अपनी नफ़्स के 

चक्कर में पड़ गया हूँ मैं,


सफलता के चक्कर में 

गुनाहों की सवारी नजर नहीं आती,

तारा बनने के चक्कर में 

अंधेरा हो गया हूँ मैं,,,


अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़...


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