Posts

कभी खूद पे कभी हालत पे रोना आया...

सच्चे या झूठे रिस्तो से डरता नहीं हूँ मै,

मुझको अपनी नजरें नूर चाहिए..

नबी-ऐ-करीम (S. A. W. )

ज़िन्दगी दी है तो जीने का हुनर भी देना...

मैंने किया...

कोई और है...

क्यों तबियत कही ठहरती नहीं...

नहीं जो दिल मे जगह तो नजर मे रहने दो...

अब कोई ना सौदा कोई जूनू भी नहीं,,,

कुछ न किसी से बोलेंगे...

भले दिनों की बात थी...

गलत थी तू और तेरी बातो का तराना...

नफरत भरी आँखों से आँखे तो मिलाते जाईये...

हम खुद ही हुए तबाह वरना...

वो यहाँ नहीं है मगर वो यही पे है...

हम तेरी चाह में वहाँ तक पहुँचे...

साथ रोती थी मेरे साथ हंसा करती थी...

हम फ़रिश्ते नहीं की हम गुनाह नहीं कर पाए...

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाले...

मेरे दिल के अब तो ये हाल है जैसे...

शायद...

अब जमाना नहीं की तुमसे कहें...

थक गया है मुसलसल सफर उदासी का

दिल का बहलना

अब वो कैसी होगी...

मैं अब कैसा लगता हूँ

नफरत-ऐ-मोहब्बत

दिल-ऐ-थकन

घर परिवार और समाज...

लड़कियों की बात

मै क्यों...? उसका हो ना पाया

खुदा की अमानत हैँ बेटियाँ

बेटियाँ

कुछ यादें 🥺

सबसे करीब मेरे रब

ये आख़री है ज़िन्दगी

My imagination Girl