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बेरोजगारी

एक टूटी हुई आश की फरियाद है हम...

अजीब दुनियां है...

ज़रूरी लगा....

माँ वो मेरी माँ...

बाप की आवाज...

कभी किसी को सोच से ज्यादा कूछ नहीं मिलता

तन्हाई कह रही है, दिलो दिमाग़ मे क्या...

बीमार है...

आँखों से आंसू गिरा कर मै सोचता रहा...

ज़िन्दगी एक पहेली सा लगे...

यह शिकन अब मेरे दिल पे परी हो जैसे...

हमको तेरा नहीं इंतजार अपना है...

मै अपने हर एक लफ्ज़ का खूद आइना हो जाऊंगा...

कहा था किसने की अहदे वफ़ा करो उससे...

कोई मेरे दिल की दुनियां मे चराग रख्खे..

सामने उसके कभी हमने खूद को जाहिर नहीं किया...

याद आया...

मै आईना हूँ मुझे टूटने की आदत है...

बहुत पानी बरसता हैँ तो मिट्टी बैठ जाती है...